देहरादून के कृष्णा नगर चौक पर बनाया गया बस अड्डा आज सवालों के घेरे में है। विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए इस बस अड्डे का न तो सही तरीके से उपयोग हो रहा है और न ही आम जनता को कोई सुविधा मिल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बस अड्डा सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गया है। यहां न तो बसें नियमित रूप से रुकती हैं और न ही यात्रियों के बैठने या सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह निर्माण किसके फायदे के लिए किया गया?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह पूरा ढांचा केवल विज्ञापन लगाने और सरकारी रिकॉर्ड में विकास दिखाने के लिए बनाया गया है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आम जनता को इससे कोई सीधा लाभ नहीं मिल रहा।
“अगर बसें ही नहीं रुकतीं, तो फिर बस अड्डा बनाने का क्या मतलब?”
— स्थानीय निवासी
लोगों का कहना है कि जनता के टैक्स का पैसा इस तरह बिना प्लानिंग के खर्च किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि या तो इस बस अड्डे को सही तरीके से चालू किया जाए या फिर इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
❓ सवाल जो उठ रहे हैं
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क्या यह बस अड्डा सिर्फ कागजों में ही चालू है?
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क्या टैक्स के पैसे का सही उपयोग हो रहा है?
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विज्ञापन से कमाई किसे फायदा पहुंचा रही है?
🗣️ निष्कर्ष
कृष्णा नगर चौक का यह बस अड्डा विकास नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों की तस्वीर बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर संज्ञान लेता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
